यौगिक क्रिया है यज्ञ, प्रक्रिया ही कर्म है:डॉक्टर वी. सिंह

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राजेश पाठक

  • गीता में वर्णित यज्ञ विषय पर आयोजित गोष्ठी में विद्वतजनों ने दिया विचार
  • राबर्ट्सगंज नगर के होटल अरिहंत प्रांगण में हुआ भव्य आयोजन
  • गीता जयंती समारोह समिति सोनभद्र ने किया था यह आयोजन
  • सोनभद्र। राबर्ट्सगंज नगर स्थित होटल अरिहंत के प्रांगण में रविवार को गीता जयंती समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें गीता में वर्णित यज्ञ विषय पर आयोजित गोष्ठी में विद्वतजनों ने अपना विचार व्यक्त किया। इसके अलावा पांच विभूतियों को गीता प्रचार प्रसार सम्मान से सम्मानित किया गया। सबसे पहले आयोजक मंडल की ओर से स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण कर एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इसके अलावा सोनभद्र मुख्यालय पर गीता जयंती समारोह के आयोजन की शुरुआत करने वाले गीता प्रेमी स्वर्गीय प्रेमनाथ चौबे के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वहीं दिव्यांगजनों को कंबल भी वितरित किया गया।
    मुख्य वक्ता गीता जयंती समारोह के संयोजक डॉक्टर वी.सिंह ने कहा कि गीता के अनुसार यज्ञ यौगिक क्रिया है। यह यज्ञ किसी तत्वदर्शी महापुरुष के सानिध्य में साधक के हृदय देश में मन और इंद्रियों के संयम द्वारा संपन्न होता है। यह शुद्ध साधनापरक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि गीता के अनुसार “यज्ञशिष्टामृतभुजो यान्ति ब्रह्म सनातनम” यज्ञ जिसे अवशेष छोड़ता है वह है अमृत। उसकी प्रत्यक्ष जानकारी ज्ञान है। उस ज्ञानामृत को भोगने अर्थात प्राप्त करने वाले योगीजन शास्वत, सनातन परब्रह्म को प्राप्त होते हैं। अर्थात यज्ञ कोई ऐसी वस्तु है जो पूर्ण होते ही सनातन परब्रह्म में प्रवेश दिला देती है। गीता के अनुसार यज्ञार्थात्कर्मणो अन्यत्र लोकोअयं कर्मबंधन:। अर्थात यज्ञ की प्रक्रिया ही कर्म है। पूर्व में जितने भी महापुरुष हुए हैं सभी ने इसी प्रकार यज्ञ कर्म को करके परम नैष्कर्म की स्थिति को प्राप्त किया है। इसी प्रकार से पारस नाथ मिश्र, रामनाथ शिवेंद्र, विनोद कुमार चौबे, डॉक्टर विमलेश त्रिपाठी, जगदीश पंथी, डॉक्टर कुसुमाकर श्रीवास्तव आदि विद्वानों ने अपना विचार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन भोलानाथ मिश्र ने किया। आगन्तुकों का स्वागत अरुण चौबे ने किया। इस मौके पर भैयालाल सिंह, सुशील कुमार श्रीवास्तव, चंद्रकांत शर्मा, विजय जैन, कृष्ण मुरारी गुप्ता, राकेश शरण मिश्र, प्रदुम्न त्रिपाठी, डॉक्टर अरुणेंद्र कुमार संदल, राजेश चौबे, वीरेंद्र देव पांडेय, सुरेंद्र कुमार पांडेय, आसुतोष पांडेय,आनन्द त्रिपाठी, राहुल चौबे, अतुल पटेल, उमाकांत मिश्रा, रामप्रसाद यादव, दयानन्द, दीपक कुमार केसरवानी आदि मौजूद रहे।
    पांच विभूतियों को किया गया सम्मानित
    सोनभद्र। गीता जयंती के अवसर पर गीता के अविनाशी योग के प्रचार-प्रसार में लगे पाँच महानुभावों को गीता जयंती समारोह समिति द्वारा सम्मानित किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद कुमार चौबे, सहायक अभियंता आर पी दूबे, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य दयाशंकर विश्वकर्मा, समाजसेवी किशोरी सिंह और हीरामणि मिश्रा को समिति द्वारा शाल ओढ़ाकर तथा सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया।

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