परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद का मनाया गया शहादत दिवस

Share this post

अजेय माने जाने वाले पेटर्न टेंक नष्ट कर किया पाकिस्तान के दांत खट्टे

ओबरा(सोनभद्र)। भारतीय गौरव परमवीर अब्दुल हमीद प्रेरणा मंच ने शनिवार को चोपन रोड स्थित एक होटल में परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद की शहादत दिवस खुर्शीद आलम की अध्यक्षता में मनाया गया। कार्यक्रम की शुरूआत परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया।

इस अवसर पर पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष उमा शंकर सिंह ने कहा कि प्रदेश के गाजीपुर जिले के एक मामूली परिवार में एक जुलाई 1933 को जन्मे वीर अब्दुल हमीद के वीरता की गाथा शब्दों में नहीं पिरोई जा सकती क्योंकि 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान वीर अब्दुल हमीद ने न सिर्फ पाकिस्तानी दुश्मनों के दांत खट्टे किए, बल्कि पाक के सात पैटर्न टैंकों के परखच्चे उड़ा दिए। इसी दौरान वह दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गए।

वही शेख जलालुद्दीन व भोला कन्नौजिया ने कहा कि पाकिस्तान से युद्ध के दौरान घर से निकलते ही अब्दुल हमीद के साथ अपशगुन हुआ था। पिता ने रोका, लेकिन वह नहीं रुके। उन्होंने उस दौरान अपनी पत्नी से सिर्फ यही कहा था, तुम बच्चों का ख्याल रखना, अल्लाह ने चाहा तो जल्द मुलाकात होगी। बिल्ली ग्राम पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि अमरेष यादव व काग्रेसी नेता रामानन्द पाण्डेय ने कहा कि शहीद वीर अब्दुल हमीद के पिता अपने क्षेत्र के पहलवानों में गिने जाते थे, लेकिन गरीबी की वजह से आजीविका के लिए वह सिलाई का काम करते थे। बेहद तंगी की हालत में पहलवान मोहम्मद उस्मान खलीफा ने अपने बड़े बेटे वीर अब्दुल हमीद को किसी तरह 5वीं तक की पढ़ाई पूरी करवाई।

अब्दुल हमीद ने 27 दिसंबर 1954 को भारतीय सेना में सैनिक के रूप में देश सेवा शुरू की। सेना में भर्ती होने के बाद सबसे पहली बार 1962 में भारत-चीन युद्ध में अब्दुल हमीद ने अपनी वीरता दिखाई। सपा नेता मुनीर अहमद व छात्र नेता पवन पटेल ने कहा कि गोलियों से घायल होने के बावजूद घुटनों और कोहनियों के बल पर चलते हुए अब्दुल ने चीन द्वारा कब्जा किए गए 14-15 किलोमीटर एरिया को क्रॉस करते हुए भारत-चीन के ओरिजिनल बॉर्डर पर तिरंगा लहराया था। युद्ध के दौरान भारतीय सेना को पता नहीं था कि अब्दुल हमीद जिंदा हैं। युद्ध खत्म होने के बाद जब पीछे से गई सेना की टुकड़ियों ने सैनिकों को शाम को बटोरना शुरू किया तो उन्हीं के बीच घायल हालत में अब्दुल हमीद मिले। वीरता को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें नेशनल सेना मेडल दिया।

कामरेड लाल चन्द्र ने कहा कि थल सेना में तैनात अब्दुल हमीद जब 33 साल के थे। 1965 की भारत-पाक जंग के दौरान दुश्मन देश की फौज ने अभेद पैटर्न टैंकों के साथ 10 सितंबर को पंजाब प्रांत के खेमकरन सेक्टर में हमला बोला। भारतीय थल सेना की चैथी बटालियन की ग्रेनेडियर यूनिट में तैनात कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद अपनी जीप में सवार दुश्मन फौज को रोकने के लिए आगे बढ़े। पैटर्न टैंकों का ग्रेनेड के जरिए सामना करना शुरू कर दिया। दुश्मन फौज हैरत में पड़ गई और भीषण गोलाबारी के बीच पलक झपकते ही अब्दुल हमीद के अचूक निशाने ने पाक सेना के पहले पैटर्न टैंक के परखच्चे उड़ा दिए। मोर्चा संभाले अब्दुल हमीद ने पाक फौज की अग्रिम पंक्ति के सात पैटर्न टैंकों को चंद मिनटों मे ही धराशायी कर डाला।

इस सभा को मुख्य रूप से राधा सिंह, सुनील प्रकाश यादव, केके पाण्डेय, अमरनाथ यादव, अशोक यादव,अतीक अहमद,अम्मार जैदी , ताजू, हरीश यादव, भानू बियार, दीपक यादव, मुकेश जायसवाल, अस्सू खान आदि ने सम्बोधित किया। सभा का संचालन पूर्व सभासद संजय गौड ने किया।

Ravi pandey
Author: Ravi pandey

Related Posts

Live Corona Update

Advertisement

Advertisement

Weather

+43
°
C
+45°
+37°
Delhi (National Capital Territory of India)
Wednesday, 30
Thursday
+44° +35°
Friday
+42° +35°
Saturday
+43° +34°
Sunday
+43° +35°
Monday
+44° +36°
Tuesday
+45° +36°
See 7-Day Forecast

 

Live Cricket Updates

Stock Market Overview

Our Visitors

0 1 6 3 5 3
Users Today : 95
Users This Month : 1156
Total Users : 16353
Views Today : 144
Views This Month : 1743
Total views : 30270

Radio Live

Verified by MonsterInsights