पांच साल के टेण्डर एक ही साल में कराने वाले बीडीओ का हुआ तबादला, दुद्धी का बनाया गया बीडीओ

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रवि पाण्डेय

दो दिन में सदर विकास खण्ड पर हुआ स्थानांतरण हुआ निरस्त

17 सितम्बर को सुनील सिंह का दुद्धी हुआ तबादला

बजट सवा करोड़ का ,टेंडर 5 करोड़ से भी ज्यादा

सरकारी धन के दुरुपयोग और बंदरबांट के है आरोप

सामाजिक कार्यकर्ता की भ्रस्टाचार के खिलाफ मुहिम लाई रंग, लड़ाई अभी बाकी

सोनभद्र। अपने दूसरे कार्यकाल में मुख्यमंत्री योगी ने जो भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ी हुई है उसमें खुद उनके अधिकारी ही पलीता लगाने में लगे हुए हैं। पांच साल के बजट का टेण्डर एक साल में निकालने वाले और कमीशनखोर भ्रष्ट बीडीओ को अधिकारी ही बचाने में जुट गये हैं। विकास के कार्यों में जमकर मनमानी और लूटपाट को अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले खण्ड विकास अधिकारी सुनील सिंह के खिलाफ शासन प्रशासन से किये जा रहे पत्राचार और जांच की मांग से घबराये जिले के आला अधिकारी अपनी गर्दन फंसती देख बीडीओ को चोपन से स्थानन्तरित करके दुद्धी विकास खण्ड में तैनाती दी जबकि 15 सितंबर को ही उनका तबादला रॉबर्ट्सगंज विकास खण्ड में तैनाती हुई थी और यहां के बीडीओ को चोपन भेजा गया , इस आदेश को निरस्त करते हुए 17 सितंबर को सुनील सिंह का दुद्धी और यहाँ के बीडीओ मनीष मिश्रा का चोपन तबादला सीडीओ द्वारा किया गया है।

क्या है पूरा मामला

15 सितंबर को हुआ तबादला आदेश

योगी 2.0 शासन काल मे भ्रस्टाचार के खिलाफ छेड़ी गयी योगी आदित्यनाथ की मुहिम की खुद उनके ही अधिकारी कैसे हवा निकाल रहे है इसका नजारा देखना हो तो सोनभद्र आईये। यहां आपको देखने को मिलेगा कि कैसे विकास के लिये आये धन की बंदरबांट करने में किस तरह प्रशासनिक अधिकारी दिन रात लगे हुए है। इतना ही नही जब इस लूट पाट को किसी के द्वारा उजागर किया जाता है तो सारे आला अधिकारी मिलकर इस मुहिम में जुट जाते हैं कि किस तरह इस मामले को दबाया जा सके। ताजा मामला विकास खण्ड चोपन का है यहाँ पूर्ववर्ती जिलाधिकारी द्वारा 105 विकास कार्यो का एक बार में अनुमोदन दिया जाता है कि इस कार्य हेतु विज्ञप्ति प्रकाशित कराकर कार्य संपादित कराए जायें। लेकिन पारदर्शिता को दरकिनार करते हुए इस कार्य को बीडीओ द्वारा कई खण्डों में गुपचुप तरीके से विज्ञापित कराया गया जिससे बार बार विज्ञापित कराने में सरकारी धन का दुरुयोग तो हुआ है साथ ही अपने चहेतों को कार्य देकर धन की बंदरबाट की जा सके। इतना ही नही आगामी चार वर्षों के कार्यो का भी टेण्डर धन की प्रत्याशा में प्रकाशित कर दिया गया जिसके पीछे विकास के लिए आने वाले धन में भारी अनियमितता करने की मंशा साफ परिलक्षित होती है।

ब्लाक प्रमुख की भूमिका भी संदिग्ध

वहीं इस पूरे प्रकरण में ब्लॉक प्रमुख की भूमिका भी संदिग्ध है क्योंकि विकास खण्ड में होने वाले कार्यो का भुगतान प्रमुख और बीडीओ दोनो के संयुक्त हस्ताक्षर से होता है । गौरतलब हो कि ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी पर सूबे के समाज कल्याण राज्य मन्त्री की पत्नी लीलावती देवी हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि इस भारी अनियमितता में मन्त्री जी की पत्नी जो ब्लॉक प्रमुख है उन्हें भी अंधेरे में रखा गया या इस गोलमाल में उनकी भी सहमति है। विकास खण्ड में मौजूदा प्रमुख यानी मन्त्री जी की पत्नी के कार्यकाल में कराए विकास कार्यो को लेकर जो पत्राचार और जांच की मांग चल रही है उसमें कही न कहीं प्रमुख भी संदिग्ध भूमिका में आ रही है और बीडीओ सुनील सिंह के तबादले को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

क्या है विकास खण्ड के हालात

चोपन ब्लाक में बीडीओ के आवासीय भवन को ध्वस्त किया गया , फाइल फोटो

इतना ही नहीं विकास खण्ड में इसी पंचवर्षीय के दो सालों में कराए गये विकास कार्यो की गुणवत्ता की जांच की जाये तो सारा मामला साफ हो जायेगा कि खेल क्या और कैसे हो रहा है। विकास खण्ड में कराये विकास कार्यो में से अधिकांश कार्यो को केवल खाना पूर्ति के कोरम में पूरा किया गया है क्योंकि प्रत्येक कार्य में दो तिहाई तक की धनराशि कमीशन के रूप में वसूल की गयी है। भारी भरकम कमीशन के कारण एक दो को छोड़कर सारे कार्य एक माह के भीतर ही पूरी तरह से जीर्ण शीर्ण हो गये हैं। विकास खण्ड में हो रही लूट पाट को रोकने के लिये जब ब्लॉक के टापू निवासी सामाजिक कार्यकर्ता सुनील त्रिपाठी “आदिवासी” ने जिलाधिकारी से शिकायत की गई तो मामले की जांच परियोजना निदेशक को सौंपी गई और परियोजना निदेशक ने आरोपों की जांच हेतु बीडीओ चोपन को ही जांच अधिकारी नियुक्त किया। अपने ही खिलाफ जांच पूरी करके बीडीओ ने सब कुछ ओके की रिपोर्ट लगा कर अपना दामन बचा लिया। विकास खण्ड चोपन में गोलमाल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद विकास खण्ड परिसर में अवस्थित बीडीओ आवास के जीर्णोद्धार का कार्य दो वर्ष पूर्व कराया गया था लेकिन जब निवर्तमान बीडीओ का तबादला हुआ हुआ तो उन्होंने भी उसी काम के लिए लाखों रुपये खर्च किया लेकिन इसकी शिकायत होने पर भुगतान पिछले डेढ़ साल से नही हो सका है। शिकायतकर्ता सुनील”आदिवासी” ने मांग करते हुए कहा कि विकास खण्ड में सीसी रोड,पुलिया निर्माण, इंटरलॉकिंग, नाली , स्ट्रीट लाइट व दूसरे कार्यो की भी जांच की जाए तो लाखों करोड़ों के गोलमाल की सच्चाई सामने आ जायेगी।

Ravi pandey
Author: Ravi pandey

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