जनजाति गौरव दिवस के आयोजन को लेकर सेवा समर्पण संस्थान का प्रतिनिधि मण्डल राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मिला

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लखनऊ। सेवा समर्पण संस्थान संबद्ध अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम सोनभद्र का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के आवास पर मिलकर जनजाति गौरव दिवस पर आयोजित होने वाले सम्मेलन एवं वनाधिकार पट्टा की समीक्षा बैठक हुई।

बैठक में सदियों से शोषित वंचित विकास से कोसों दूर रहने वाले जनजाति समाज के समृद्ध करने पर चर्चाएं हुई। बैठक से संबंधित सूचना देते हुए सेवा समर्पण संस्थान के सह मंत्री आलोक कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल सह संगठन मंत्री उत्तर प्रदेश आनंद के नेतृत्व में सेवा समर्पण संस्थान के जिलाध्यक्ष विमल सिंह , राज्यमंत्री संजीव कुमार गोंड़, अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के पूर्व सदस्य रामसेवक खरवार , घोरावल विधायक डॉ अनिल कुमार मौर्य, सदर विधायक भूपेश चौबे और दुद्धी विधायक रामदुलार गोंड़ बैठक में उपस्थित रहे।

बैठक में समीक्षा के दौरान आनंद ने बताया कि सदियों से शोषित वंचित और विकास से कोसों दूर रहने वाला जनजाति समाज वर्तमान सरकार की बनने के बाद से अपने आप को सरकार के सहयोग से सुदृढ़ करने में सफल हुआ है। सरकार और संगठन दोनों की मंशा है कि 15 नवंबर को जनजाति समाज अपना गौरव दिवस मना रहा होगा तब जनपद में इस समाज को वन अधिकार पट्टा प्रमाण पत्र वितरण किया जा रहा होगा। जिस पर पूर्ण सहमति जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समाज के विकास हेतु जितना संभव हो पाएगा सरकार वह सब कदम उठाएगी आप सब पूर्ण आस्वस्त रहें। राजभवन में आयोजित बैठक में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि सेवा समर्पण संस्थान जनपद सोनभद्र समेत संपूर्ण प्रदेश में वनवासी समाज के लिए जो कार्य कर रहा है अत्यधिक सराहनीय है इसलिए इस सेवा कार्य को ईश्वरी कार्य मान कर आयोजित होने वाले हर कार्यक्रम में उपस्थित रहना अपने आप में एक गौरव का विषय है।

राज भवन में बैठक के दौरान सेवा समर्पण संस्थान के क्षेत्र संगठन मंत्री मनीराम पाल ने कहा कि आप के मार्गदर्शन में कार्यक्रम संपन्न हो रहा है जो अत्यधिक हम सबके लिए गौरवशाली विषय है।

सह संगठन मंत्री प्रदेश आनंद ने कहा की वर्तमान समय में जनजातिय समूह में विभिन्न परिवर्तन दिखाई देते हैं जिसका एक कारण आधुनिकता , प्रौद्योगिकी एवं पत्रकारिता भी है। वर्तमान समय में जनजातिय समाज सभ्य समाज के संपर्क से अपने विकास पथ की ओर आगे बढ़ रहे हैं। इसका एक मुख्य कारण जनजाति समाज के व्यक्ति में शिक्षा के प्रति जागरूकता और मनोवैज्ञानिक परिवर्तन से हैं। उन समाजों में समाज के साथ शैक्षणिक राजनीतिक और धार्मिक परिवर्तन भी अधिक देखने को मिल रहा है।

जिलाध्यक्ष जेसी विमल सिंह ने कहा की भारत की सभ्यता और संस्कृति अपने आप में एक विशिष्ट पहचान लिए हुए हैं। इसका मुख्य कारण यहां निवास करने वाले व्यक्तियों की सांस्कृतिक गतिविधियों का सामान होना जो अपने आप में अकल्पनीय है और इनकी एकता भारतीय समानता की प्रमाणिकता है। इसलिए भारत देश को अनेकता में एकता वाला देश भी कहा जाता है।

सह मंत्री आलोक कुमार चतुर्वेदी ने कहा की भारत में विभिन्न प्रजाति निवास करती हैं। इन प्रजातियों के मिश्रण से भारत को विभिन्न प्रजातियों का निवास स्थान भी कहते हैं। यहां के जंगलों और पहाड़ों में निवास करने वाले कुछ मानवीय समूह आधुनिक समाज के विकास क्रम में अलग रह गए हैं। इन समूहों में विकास की क्रियाः का लाभ फलतः नहीं मिल पा रहा है। इन अस्मरणीय परिस्थितियों में निवास करने वाला यह समूह , विकास और सभ्यता जैसे बिंदुओं के कारण इनका जीवन अपनी परंपरागत जीवन शैली पर आश्रित है परंतु नई आधुनिक विचारधारा और पत्रकारिता ने इन दुर्गम स्थानों में निवास करने वाले जनजातिय समूह के व्यक्तियों में एक नई प्रकाश की रोशनी दी है जिसके कारण समूह के व्यक्तियों में अधिकारों के प्रति जागरूकता आई है और अपने जीवन को आधुनिक और सभ्य समाज के साथ जोड़ पाने में संभव हो पाए है।

Ravi pandey
Author: Ravi pandey

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